नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ईरान ने कतर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस सुविधा ‘रास लफान’ LNG कॉम्प्लेक्स पर मिसाइल हमला कर दिया, जिससे प्लांट में भीषण आग लग गई। हमले के बाद पूरे इलाके में काले धुएं का गुबार छा गया और बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
कतर एनर्जी ने हमले की पुष्टि, महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान
कतर एनर्जी ने आधिकारिक तौर पर हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल सीधे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर गिरी, जिससे भारी क्षति हुई है। यह हमला न सिर्फ कतर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, बल्कि इससे वैश्विक गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल, गैस संकट का खतरा
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की किल्लत और कीमतों में तेज उछाल की आशंका गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती यह टकराव की स्थिति दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर डाल सकती है।
कतर का कड़ा कदम, ईरानी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश
हमले के बाद कतर ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी दूतावास के कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। कतर के विदेश मंत्रालय ने मिलिट्री और सिक्योरिटी अटैची समेत संबंधित अधिकारियों को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है। कतर का आरोप है कि ईरान ने एक साथ पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है।
सऊदी अरब भी निशाने पर, मिसाइलें हवा में नष्ट
ईरान के हमले केवल कतर तक सीमित नहीं रहे। सऊदी अरब की राजधानी रियाद को भी निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। इस दौरान मलबा रिहायशी इलाकों में गिरने से कुछ लोग घायल हुए हैं।
‘साउथ पार्स’ गैस फील्ड बना टकराव का केंद्र
तनाव तब और बढ़ गया जब इजरायली वायुसेना ने ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार ‘साउथ पार्स’ का हिस्सा है। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी देते हुए अपने ऊर्जा ठिकानों को खाली करने को कहा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट, सप्लाई पर असर
दुनिया की तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी तनावपूर्ण हो गई है। ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी है, जिससे कई देशों को तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, महंगाई का खतरा
इस बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में साफ दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी आई है और यह 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। युद्ध शुरू होने के बाद से कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव जारी रहा तो वैश्विक महंगाई पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
वैश्विक संकट की ओर बढ़ता टकराव
मिडिल ईस्ट में बढ़ती यह ‘ऑयल वॉर’ अब क्षेत्रीय संघर्ष से निकलकर वैश्विक संकट का रूप लेती नजर आ रही है। ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
